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कौन हैं आशीष वासवानी? BIT मेसरा का 'हीरा', साथियों के साथ मिलकर लिखी 'AI की बाइबल' और बदल गई दुनिया

Ashish Vaswani BIT Mesra Alumni: आज दुनिया जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्रांति की बात कर रही है, उसकी बुनियाद रखने वालों में एक नाम भारत से भी जुड़ा है. झारखंड के BIT मेसरा से पढ़ाई करने वाले आशीष वासवानी उन वैज्ञानिकों में शामिल हैं, जिन्होंने ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर विकसित किया. यही तकनीक आज ChatGPT, Gemini, Grok, DeepSeek और लगभग सभी बड़े जनरेटिव AI मॉडल्स की रीढ़ मानी जाती है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस तकनीक ने वैश्विक टेक उद्योग में करीब 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की की नई वैल्यू पैदा करने में अहम भूमिका निभाई है.

नागपुर से अमेरिका तक का सफर

आशीष वासवानी का बचपन ओमान में बीता. बाद में उनका परिवार भारत आ गया और उन्होंने नागपुर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. विज्ञान और गणित में उनकी गहरी रुचि थी. स्कूल के दिनों में जगदीश चंद्र बोस, सीवी रमन और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स जैसे लोगों की कहानियों ने उन्हें काफी प्रेरित किया.

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स्कूल के बाद आशीष वासवानी ने वर्ष 2002 में झारखंड के प्रतिष्ठित संस्थान BIT मेसरा से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी. उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इस संस्थान का एक छात्र आगे चलकर ऐसी तकनीक विकसित करने वाली टीम का हिस्सा बनेगा, जो पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा बदल देगी.

BIT मेसरा लंबे समय से इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन आशीष वासवानी की उपलब्धि ने संस्थान का नाम वैश्विक AI रिसर्च के नक्शे पर भी दर्ज करा दिया. आज उन्हें BIT मेसरा के सबसे चर्चित पूर्व छात्रों में गिना जाता है. कुछ समय तक उन्होंने आईटी सेक्टर में काम किया, लेकिन जल्द ही महसूस किया कि उनकी असली रुचि शोध और विज्ञान में है. इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए.

पीएचडी के दौरान बदली दिशा

आशीष ने यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया में दाखिला लिया और कंप्यूटर साइंस में पीएचडी पूरी की. उनका रिसर्च प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (Natural Language Processing) से जुड़ा था. इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बनने वाली है. यह सोच उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक गूगल तक ले गई.

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Google Brain में हुआ इतिहास

गूगल ब्रेन टीम में काम करते हुए आशीष वासवानी ने कई शोध परियोजनाओं पर काम किया. वर्ष 2017 में उन्होंने अपने साथियों के साथ ‘Attention Is All You Need’ (अटेंशन ऑल यू नीड) नामक शोध पत्र प्रकाशित किया. यही वह पेपर था, जिसने ट्रांसफॉर्मर मॉडल को दुनिया के सामने पेश किया. इस मॉडल ने मशीनों को भाषा समझने और इंसानों की तरह टेक्स्ट तैयार करने की क्षमता देने का नया रास्ता खोला. इस पेपर में भारत से केवल आशीष ही नहीं थे, बल्कि पुणे की निकी परमार भी शामिल थीं. इन दोनों के अलावा, नोआम शाजीर, जेकब उसकोरेट, लियन जोन्स, ऐडन एन. गोमेज, लुकास कैसर और इलिया पोलोसुखिन भी सह लेखक थे. 

आखिर ‘Attention Is All You Need’ में ऐसा क्या था?

2017 में प्रकाशित ‘Attention Is All You Need’ केवल एक रिसर्च पेपर नहीं था, बल्कि AI के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ. इससे पहले भाषा समझने वाले अधिकांश AI मॉडल RNN और LSTM जैसी तकनीकों पर आधारित थे, जो लंबी जानकारी को प्रोसेस करने में सीमित थीं और काफी धीमी भी थीं.

आशीष वासवानी और उनकी टीम ने ‘ट्रांसफॉर्मर’ आर्किटेक्चर पेश किया, जिसकी सबसे बड़ी खासियत Self-Attention Mechanism थी. यह तकनीक मशीन को किसी वाक्य या दस्तावेज के अलग-अलग हिस्सों के बीच संबंध समझने में मदद करती है.

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उदाहरण के लिए, अगर किसी लंबे पैराग्राफ में किसी व्यक्ति का नाम शुरुआत में लिखा है, तो ट्रांसफॉर्मर मॉडल बाद की पंक्तियों में भी उस नाम के संदर्भ को आसानी से समझ सकता है. पहले के मॉडल ऐसा करने में काफी संघर्ष करते थे. इस तकनीक के तीन बड़े फायदे हैं:

  • भाषा को पहले से ज्यादा बेहतर तरीके से समझना.
  • विशाल मात्रा में डेटा पर तेज गति से प्रशिक्षण देना.
  • बड़े और अधिक शक्तिशाली AI मॉडल बनाना.

यही वजह है कि बाद में Google का BERT, OpenAI का GPT, ChatGPT, Gemini, Claude, Grok और DeepSeek जैसे मॉडल इसी तकनीकी ढांचे पर विकसित हुए. मशीन लर्निंग की दुनिया में यह शोध पत्र सबसे ज्यादा कोट किए जाने वाले पेपर्स में शामिल है. इसलिए इसे एआई की बाइबल कहने में संकोच नहीं किया जा सकता. 

आज AI उद्योग में ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर को उसी तरह देखा जाता है, जैसे इंटरनेट की दुनिया में वर्ल्ड वाइड वेब या कंप्यूटिंग में माइक्रोप्रोसेसर को. यही कारण है कि ‘Attention Is All You Need’ को कई विशेषज्ञ AI की ‘बाइबल’ और 21वीं सदी के सबसे प्रभावशाली शोध पत्रों में से एक मानते हैं.

अगर आप Attention Is All You Need रिसर्च पेपर को पढ़ना चाहते हैं, तो लिंक पर क्लिक कर सकते हैं.

केवल ‘Attention Is All You Need’ ही नहीं निकी परमार और आशीष वासवानी ने मिलकर इमेज जेनरेशन के शुरुआती रिसर्च पेपर भी लिखे हैं. दोनों ने 2018 में अपने साथियों के साथ मिलकर इसका ब्लूप्रिंट पब्लिश किया था. इसे आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

क्यों खास हैं आशीष वासवानी?

AI की दुनिया में कई बड़े नाम हैं, लेकिन आशीष वासवानी का महत्व इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने उस तकनीकी ढांचे को विकसित करने में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिस पर आज का पूरा जनरेटिव AI इकोसिस्टम खड़ा है.

एक इंटरव्यू में आशीष वासवानी ने स्वीकार किया था कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका शोध इतना बड़ा प्रभाव डालेगा. उनके मुताबिक उनका उद्देश्य सिर्फ मशीन लर्निंग को बेहतर बनाना था, लेकिन बाद में यह तकनीक पूरी दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास की दिशा बदलने वाली साबित हुई.

Google छोड़कर बनाई अपनी कंपनियां

गूगल में छह साल से ज्यादा समय बिताने के बाद आशीष ने 2021 में कंपनी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने Adept AI Labs की सह-स्थापना की, जो AI एजेंट और ऑटोमेशन तकनीकों पर काम करती है. बाद में उन्होंने अपनी सहयोगी निकी परमार के साथ Essential AI नामक स्टार्टअप शुरू किया. निकी परमार भी ट्रांसफॉर्मर तकनीक के विकास में शामिल रही थीं.

Essential AI का लक्ष्य विज्ञान, इंजीनियरिंग, कोडिंग और शोध से जुड़े जटिल कार्यों के लिए शक्तिशाली AI मॉडल तैयार करना है. कंपनी को Google, Nvidia, AMD और कई बड़े निवेशकों का समर्थन मिला है.

भारत को लेकर क्या सोचते हैं आशीष?

आशीष वासवानी का मानना है कि भारत में दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली इंजीनियर और वैज्ञानिक मौजूद हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत को केवल AI के उपयोगकर्ता की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मूलभूत AI तकनीकों के विकास में भी नेतृत्व करना चाहिए. वे भारत में अपनी कंपनी की टीम बनाने, साझेदार खोजने और AI रिसर्च को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं.

एआई से पैदा हुई 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की वेल्थ

2017 में प्रकाशित ‘Attention Is All You Need’ महज 15 पन्नों का शोधपत्र था, लेकिन इसी ने उस तकनीकी ढांचे को जन्म दिया जिस पर आज ट्रिलियन डॉलर वैल्यू वाली AI अर्थव्यवस्था खड़ी है. Nvidia से लेकर Microsoft और Google तक, AI बूम से लाभान्वित होने वाली अधिकांश कंपनियों की सफलता के केंद्र में कहीं न कहीं ट्रांसफॉर्मर तकनीक मौजूद है. इसलिए कई विश्लेषक इसे 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की वैश्विक वैल्यू क्रिएशन की आधारशिला मानते हैं.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रत्यक्ष वैश्विक बाजार अभी करीब 900 अरब डॉलर के आसपास आंका जाता है, लेकिन ट्रांसफॉर्मर तकनीक के प्रभाव को केवल AI सॉफ्टवेयर उद्योग तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता. ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर पर आधारित AI क्रांति ने क्लाउड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, सॉफ्टवेयर और डिजिटल सेवाओं के पूरे इकोसिस्टम को नई गति दी है. 

ChatGPT, Gemini, Claude, Copilot और DeepSeek जैसे जनरेटिव AI मॉडल्स के आने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के मूल्यांकन में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है. AI क्रांति के आर्थिक प्रभाव का अंदाजा दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के बाजार मूल्य से लगाया जा सकता है. 

जून 2026 तक AI इकोसिस्टम की प्रमुख कंपनियों में Nvidia का मार्केट कैप करीब 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है. Microsoft का बाजार मूल्य लगभग 3.8 ट्रिलियन डॉलर, Apple का करीब 3 ट्रिलियन डॉलर, Alphabet (Google) का लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर, Amazon का करीब 2.4 ट्रिलियन डॉलर और Meta का बाजार पूंजीकरण 1.8 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है.

इसी वजह से कई टेक विश्लेषक मानते हैं कि 2017 में प्रकाशित ‘Attention Is All You Need’ शोधपत्र ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक बाजार में 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक मूल्य सृजित करने की नींव रखी. हालांकि यह कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन AI से जुड़ी कंपनियों के बाजार मूल्य, निवेश और तकनीकी विस्तार को देखते हुए यह अनुमान व्यापक रूप से चर्चा में है.

तुलना करें तो 10 ट्रिलियन डॉलर की राशि भारत की वर्तमान अर्थव्यवस्था के आकार से भी कई गुना बड़ी है. भारत की अर्थव्यवस्था 4.18 ट्रिलियन डॉलर मानी जाती है. हाल ही में ताइवान की केवल एक कंपनी टीएसएमसी ने भारत के शेयर बाजार को पीछे करने में बड़ी भूमिका निभाई है. यह ताइवान के शेयर मार्केट में 42 प्रतिशत की हिस्सेदार है. चिप बनाने वाली यह कंपनी एआई क्रांति की सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक है.

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बीआईटी मेसरा के हीरा हैं आशीष वासवानी

यही कारण है कि आशीष वासवानी और उनकी टीम के इस शोधपत्र को कंप्यूटर विज्ञान के इतिहास के सबसे प्रभावशाली नवाचारों में गिना जाता है. BIT मेसरा के पूर्व छात्र आशीष वासवानी और उनकी टीम ने केवल एक रिसर्च पेपर नहीं लिखा था, बल्कि उस तकनीकी ढांचे की नींव रखी थी जिसने दुनिया भर में ट्रिलियन डॉलर की नई आर्थिक वैल्यू पैदा की. कई विश्लेषक इसी आधार पर ट्रांसफॉर्मर तकनीक को इतिहास की सबसे प्रभावशाली कंप्यूटर साइंस खोजों में से एक मानते हैं.

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Prakash Gupta

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच, आज 4 जून को भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की नई दरें जारी कर दी हैं. देश के प्रमुख शहरों में कीमतें काफी हद तक स्थिर हैं या उनमें केवल कुछ पैसे का ही बदलाव हुआ है.

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