राजनीति में वीआईपी कल्चर और आलीशान शादियों के इस दौर में छत्तीसगढ़ से एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आई है। कोई फाइव-स्टार रिसॉर्ट नहीं। कोई करोड़ों का खर्च नहीं। छत्तीसगढ़ बीजेपी विधायक दीपेश साहू की शादी ने सादगी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बेमेतरा से विधायक दीपेश साहू ने रविवार को ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के तहत एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में सात फेरे लिए। यह 2026 के राजनीतिक गलियारों की सबसे चर्चित और सकारात्मक घटना बन गई है।
बैलगाड़ी पर बारात, डिप्टी सीएम बने सारथी
बारात का एंट्री स्टाइल एकदम अलग था। महंगी कारों का काफिला नहीं, बल्कि सजी-धजी बैलगाड़ी। भीड़ का उत्साह चरम पर था। इस ऐतिहासिक पल के सारथी खुद छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव बने। उन्होंने बैलगाड़ी की लगाम थामी और विधायक जी की बारात को विवाह स्थल तक पहुंचाया।

एक साधारण परिवार की बेटी बनीं हमसफर
दीपेश साहू ने जिस तरुणा साहू का हाथ थामा, वह एक बेहद साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता पेशे से एक ड्राइवर हैं और मां गृहिणी हैं। इस सामूहिक विवाह सम्मेलन में विधायक साहू समेत कुल 23 जोड़ों का विवाह पूरे विधि-विधान से संपन्न हुआ। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी मौजूदा विधायक ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के मंच पर इस तरह शादी की हो।
कार्यक्रम के मुख्य आंकड़े
शिक्षा के लिए समर्पित की सहायता राशि
इस समारोह में नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने के लिए खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी पहुंचे।
दीपेश साहू 2023 में पहली बार विधायक चुने गए थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने करीब एक दशक तक शिक्षक की भूमिका निभाई है। एक शिक्षक का दिल आज भी उनके अंदर धड़कता है। ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के तहत सरकार की ओर से वधू को 35 हजार रुपये का चेक सहायता राशि के रूप में दिया जाता है। विधायक ने मंच से ऐलान किया कि वे इस राशि को खुद पर खर्च करने के बजाय समाज की मेधावी छात्राओं की आगे की पढ़ाई के लिए दान करेंगे।

उन्होंने साफ कर दिया कि आज के समय में शादियों में बढ़ता दिखावा एक गंभीर समस्या है। सामूहिक विवाह समाज को एक सही दिशा देने की बेहतरीन पहल है। उन्होंने सिर्फ भाषण नहीं दिया; उन्होंने जमीन पर उतरकर उसे सच साबित किया।
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