नेपाल सरकार ने पलटा फैसला। नेपाली नागरिक अब भारत से बिना शुल्क सामान ला सकेंगे। कम से कम फिलहाल के लिए।
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने बालेन शाह सरकार के उस विवादित प्रावधान पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई थी।

सीमा के पास रहने वाले लोगों ने राहत की सांस ली। बीरगंज, भैरहवा और तराई के इलाकों में चेकपोस्ट पर पहले जो तनाव था, वह अब थोड़ा कम हुआ है।
अप्रैल में क्या हुआ था
अप्रैल 2026 में नेपाली नववर्ष के बाद सरकार ने एक पुराने नियम को सख्ती से लागू करना शुरू किया। भारत से लाए गए 100 नेपाली रुपये से ज्यादा के सामान पर 5 से 80 प्रतिशत तक ड्यूटी और 13 प्रतिशत वैट लगाने का आदेश दिया गया।
रोजमर्रा की चीजें जैसे दाल, तेल, चीनी, सब्जियां, बिस्किट और चिप्स तक प्रभावित हुईं। सीमा पार से खरीदारी करने वाले परिवारों को अचानक भारी खर्च का सामना करना पड़ा।

बीरगंज जैसे इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। लोग कहते थे कि यह खुली सीमा की पुरानी परंपरा पर हमला है। भारतीय राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश के छोटे व्यापारियों को भी नुकसान हुआ।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
16 मई 2026 को नेपाल सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त पीठ ने अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने प्रधानमंत्री कार्यालय, मंत्रिपरिषद और वित्त मंत्रालय को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक इस प्रावधान को लागू न किया जाए। स्थिति पहले जैसी बनी रहे।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि नियम का क्रियान्वयन आम नागरिकों पर अनुचित बोझ डाल रहा है। कोर्ट ने उनकी बात सुनी और स्टे ऑर्डर दे दिया।

यह फैसला बालेन शाह सरकार के लिए एक बड़ा झटका था। सरकार का मकसद स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देना और राजस्व बढ़ाना था, लेकिन आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी।
सीमा पर क्या बदला
पहले चेकपोस्ट पर छोटे-छोटे सामान पर भी बहस होती थी। एक पैकेट चिप्स या ठंडा पेय पदार्थ पर भी ड्यूटी मांगी जाती थी। अब वह सख्ती थम गई है।
तराई-मधेस क्षेत्र के निवासी फिर से भारत की ओर रुख कर रहे हैं। सस्ता सामान लाने की पुरानी आदत फिर से जीवित हो रही है। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा कि उसके छोटे व्यवसाय को फिर से सांस मिली है।
मांएं बच्चों के लिए जरूरी चीजें बिना अतिरिक्त टैक्स के ला रही हैं। यह छोटी राहत उनके लिए बड़ी है।
आगे क्या होगा
अभी यह अंतरिम रोक है। अंतिम फैसला आने तक यही स्थिति बनी रहेगी। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार आगामी बजट में 100 रुपये की सीमा को बढ़ाकर 2000-2500 रुपये करने पर विचार कर रही है।
1950 की भारत-नेपाल शांति और मैत्री संधि के तहत खुली सीमा की भावना को भी ध्यान में रखना होगा। दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के आवागमन का पुराना रिश्ता है।
सरकार और अदालत के बीच यह खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन फिलहाल नेपाली नागरिकों को राहत मिली है।
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